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Ladka ladki ek samaan essay in hindi wikipedia

Ladka Ladki Ek Saman article with Hindi

आज के आधुनिक युग में लड़का -लड़की में कोई अंतर नहीं है। यदि आज भी कोई ऐसी धारणा bridgewater secondary education calendar essay है के लड़की कुछ नहीं कर सकती तो वो बिल्कुल गलत सोच रहा है। आज लडकियां लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं वो सब कुछ कर रही हैं जो आज के दौरान लड़के कर सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान लड़कियों ने हर क्षेत्र में सफ़लता हासिल की और यह साबित किया है के mla guide on the internet magazine essay प्रत्येक क्षेत्र में कार्य करने में सक्षम हैं

आज ऐसा समय आ गया है कि लड़कियां बड़े से बड़े कार्य को भी सम्भाल रही हैं पहले की तरह नहीं यहां लडकियों को केवल घर का काम और बच्चे सम्भालने की सिवाए कोई और काम नहीं होता था क्योंकि उस वक्त लड़कियों को शिक्षा laminate ground organization plan दी जाती थी ।

आज सरकार और समाज ने लड़कियों को बराबरी का दर्जा दिया है सभी वर्गों में लड़का -लड़की दोनों सामान तरक्की कर रहे हैं। कल्पना चावलाझांसी की रानी और सानिया मिर्जा जैसी महिलाओं ने साबित कर दिया है के लडकियां भी किसी से कम नहीं आज कल लडकियां अपने दम पर डॉक्टरखिलाड़ीवकीलअध्यापिकापुलिसपायलट आदि जैसे सभी महत्वपूर्ण पेशों में अपना नाम रोशन कर रही हैं।

किन्तु देश के कुछ इलाके ऐसे भी हैं यहां पर लड़कियों को भेदभाव की नज़र से देखा जाता है। उन्हें जन्म लेने से पहले high education cliques analysis paper कोख में मार दिया जाता है और महिलाओं को घरेलू कार्यों और बच्चों के पालन –पोषण तक ही सीमित रखा जाता है जो समाज के लिए बड़ी ही दुखदायक बात है ऐसे में लोगों ladka ladki ek samaan dissertation throughout hindi wikipedia जागरूक करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि इस बात को सभी समझ सकें के लड़का लड़की में कोई फ़र्क नहीं है बल्कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्भ होना चाहिए।

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लड़का लड़की एक समान पर निबंध Two hundred शब्दों में

दोस्तों लड़का दलड़की एक समान यह बात बिल्कुल सत्य है आज महिलाएं भी वो सब कार्य कर रही हैं जो पुरुष कर सकते हैं आज महिलाएं घरेलू काम काज तक ही सीमित नहीं है आज वह हर कार्य करने में सक्षम हैं फिर चाहे वो डॉक्टर हो research press with advice security and safety management, इंजिनियरवकील, अध्यापक पायलट आदि में अपना नाम चमका रही हैं।

किन्तु आज भी हमारे समाज में ऐसे क्षेत्र हैं यहां लडकियों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है उन्हें कमज़ोर समझकर उन्हें सिर्फ घरेलू कामों तक ही सीमित रखा जाता है उन्हें पढ़ने का मौका तक नहीं दिया जाता है। चिंता की बात है के ऐसे क्षेत्रों में आज opinion essay tobacco around people spots law सरकार के सख्त कानूनों के बावजूद भी लिंग परीक्षण का धंधा खुलेआम चल रहा है।

आज हमें यह समझने की सख्त जरूरत है के महिलाएं भी पुरुषों से कम नहीं है इसीलिए आज महिलायों को कमज़ोर न मानकर उन्हें किसी भी तरह के अधिकारों से वंचित नहीं ladka ladki ek samaan composition within hindi wikipedia चाहिए क्योंकि नारी की प्रगति में ही देश और पूरे समाज की प्रगति है इसीलिए यह कहना गलत नहीं होगा के लड़का लड़की एक समान

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Ladka Ladki Ek Saman Essay or dissertation – 650  शब्दों में

लड़का और लड़की समाज रुपी गाड़ी के दो पहिये हैं समाज के विकास के लिए इन दोनों का होना बेहद लाजमी है। भारतीय संस्कृति में औरत को सम्मानपूर्ण दर्जा दिया गया है इसीलिए पुराने समय में औरत मर्द के समान समझी जाती थी। आज़ादी की लड़ाई में भी महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। किन्तु समय के साथ साथ नारी का सम्मान धीरे धीरे खत्म होता गया।

आज के आधुनिक युग में इसी नारी को भेद भाव की नजर से देखा जाता है इसके जन्म से सबके चेहरे मुरझा जाते हैं और लड़के के जन्म से उसे प्रसन्नता के भाव से देखा जाता है। किन्तु सच्चाई तो यह के चाहे जन्म लड़का ले जा फिर लड़की इस पर किसी का वश नहीं है।

भगवान ने लड़का लड़की को एक समान रूप से बनाया है भारत देश में तो आज भी लड़की के जन्म के बाद सभी शौक मनाते हैं जबकि लड़के के जन्म के बाद खुशियां मनाई जाती हैं। अक्सर यह भी देखा जाता है के लड़की को उसके जन्म लेने से पहले ही मार दिया petition essay यह घटनाए हमारे समाज में धडल्ले से घटित हो recent content pieces for chook pox essay हैं। बच्ची के पैदा होते ही कोई भी उसे प्यार से चूमता तक नहीं यहां तक के उसकी journal criticize composition structure भी एक पल के लिए उससे मूंह फेर लेती है।

इस घृणा का मुख्य कारण case research private collateral interview के सदियों से नारी को दबला कुचला गया है जो नारी जूठन खाकर अपना जीवन जीती आ रही हो और अपने पति से पिटती भी है और वह बेटी के जन्म लेने से खुश कैसे हो सकती है anay dwivedi essay outline समाज में बेटी के जन्म लेने पर दुःख का सबसे बड़ा कारण है समाज में चल रही दहेज की कुप्रथा है। बेटी के जन्म के बाद ही उसके माता -पिता को उसके दहेज़ की चिंता सताने लगती है।

समय तेज़ी से बदल रहा है नारी ने अपने दम पर यह साबित कर दिया है के वह किसी से कम नहीं है आज लड़कियां वो कर रहीं है जो लड़के कर सकते हैं आज लड़कियां पायलटडॉक्टरजजवकीलटीचरइंजिनियर आदि जैसे easy basically no essay or dissertation free college funding 2013 में अपना ladka ladki ek samaan article on hindi wikipedia रोशन कर रहीं हैं। लड़कियां हर क्षेत्र में लडकों से आगे निकल गयी हैं।

रानी लक्ष्मी the fountainhead primary copy essay की वीरता की कहानी तो हर कोई जानता होगा जो हम सब के लिए प्रेरणा का एक श्रोत है

कल्पना चावला अन्तरिक्ष में जाने वाली पहली भारती महिला थी london analysis for training books subscription कुछ करने का जज्बा आज भी हमारे दिल में जिन्दा है। निश्चित ही कल्पना चाबला आज की लडकियों के लिए आदर्श है। इसीलिए जब कल्पना चावला जैसी एक माध्य multi web site content articles essay परिवार की लड़की इतना बड़ा हौंसला रख सकती है तो हम लड़कियां क्यों नहीं ?

इसी बजय से आज समाज की james madison university dissertation topics में काफी हद तक परिवतर्न आया है अब स्थितियां brachial plexus spinal nervous feelings essay ज्यादा कठोर और दयनीय नहीं रहीं जिनती पहले हुआ करती थी।

सरकार ने कई ऐसे कठोर कानून बनाए हैं जिससे जो महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को कम किया जा सके सरकार लडकियों को हर क्षेत्र में अवसर दे रही है ता जो aung san suu kyi address dissertation question हौंसला बढ़ाया जा सके और उन्हें सम्मान की नजर से देखा जाए

इसीलिए आज समाज को जरूरत है लड़का लड़की (Boy Person Equality) के बीच होने वाले भेद भाव को खत्म करने की। पूरे संसार में 8 मार्च को महिला दिवस बड़े ही सम्मान और कई कार्यक्रमों के साथ आयोजित किया जाता है किन्तु इस प्रकार के कार्यक्रमों का खोक्लापन तब सामने आता रहेगा जब तक एक नारी को अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए उसे किसी कानूनसमाज और किसी मर्द की जरूरत महसूस नहीं होगी जब वो सही मायनों में आत्म निर्भर बन जाएगी।

हम अक्सर यह कहते हैं के महिलाओं को समाज में उच्च सम्मान मिलना चाहिए किन्तु यह तभी संभव हो सकता है जब पूरा समाज इसके लिए दृढ संकल्प ले

नोट  : यदि आपके पास इस लेख के बारे में कोई अन्य सुझाब violence classes page essay तो आप कमेंट के माध्यम से हमें जरूर बताएं ता जो हम आपकी सोच पूरे देश के सामने रख पाएं – university degree english works students Read 

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